ईरान में एकता का आह्वान, खामेनेई ने विदेशी साजिशों के खिलाफ चेताया
तेहरान: ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी की 37वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पवित्र मकबरे पर एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक समारोह के दौरान देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता मोजतबा खामेनेई का एक विशेष और बेहद महत्वपूर्ण लिखित संदेश पढ़कर सुनाया गया। इस आधिकारिक संदेश में देश की संप्रभुता को बनाए रखने और वैश्विक मंच पर ईरान की भूमिका को लेकर कई बड़ी बातें कही गईं।
दुश्मनों की चालों को नाकाम करने की अपील
अपने आधिकारिक संदेश में सर्वोच्च नेता ने देश की जनता और प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक महाशक्तियों की चालों को विफल करने के लिए देश में आपसी भरोसा, राष्ट्रीय एकता, दूरदर्शिता और अटूट दृढ़ता बेहद जरूरी है। उन्होंने आगाह किया कि किसी भी परिस्थिति में विरोधियों और शत्रुओं के एजेंडे का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पुण्यतिथि केवल एक शोक का दिन नहीं है, बल्कि यह इमाम खुमैनी के सिद्धांतों और उनके द्वारा दिखाए गए क्रांतिकारी रास्ते पर चलने की देश की एक वार्षिक सामूहिक प्रतिज्ञा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरानी राष्ट्र अपने नए संकल्पों के साथ आज वैश्विक मोर्चे पर स्वतंत्रता प्रिय देशों के लिए आत्मसम्मान और गौरव का मुख्य स्रोत बन चुका है।
क्षेत्रीय तनाव और इजरायल पर तीखा हमला
इस संदेश में मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) के मौजूदा भू-राजनीतिक हालातों और इजरायल के साथ चल रहे कड़े तनाव का भी खुलकर जिक्र किया गया। संदेश में बेहद सख्त लहजे में कहा गया कि इस क्षेत्र को अस्थिर करने वाली ताकतें और इजरायल का अस्तित्व अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। ईश्वर की कृपा और पूर्व के नीतिगत बयानों के अनुसार, वह समय अब दूर नहीं है जब यह दमनकारी व्यवस्था अपनी तय समय-सीमा से आगे नहीं टिक पाएगी। इस संदेश को पढ़ने के दौरान वहां मौजूद हजारों की संख्या में आए नागरिक, सेना के आला अधिकारी और विदेशी राजनयिक बेहद गंभीर नजर आए।
ईरान-अमेरिका सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा दावा
दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी प्रशासन के भीतर चल रही अंदरूनी चर्चाओं की भी कुछ बातें सामने आई हैं। इन दावों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी सलाहकारों और रणनीतिकारों के साथ एक बंद कमरे की बैठक में यह स्पष्ट किया है कि वे ईरान के साथ किसी भी बड़े और सीधे सैन्य युद्ध को शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं।
हालांकि, यह भी कहा गया है कि यदि इस क्षेत्र में किसी भी हमले में अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचता है, तो वे मौजूदा युद्धविराम को समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध का जोखिम उठाने के बजाय कुछ हफ्तों या महीनों तक चलने वाली छोटी-मोटी सैन्य झड़पों या जवाबी कार्रवाइयों को बर्दाश्त करना बेहतर समझते हैं।
अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्ति को लेकर कूटनीतिक गतिरोध
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बेहद गोपनीय कूटनीतिक बातचीत में एक बड़ा अवरोध पैदा हो गया है। इस गतिरोध की मुख्य वजह यह है कि ईरान ने किसी भी प्रकार के समझौते की शुरुआत करने से पहले अपनी उस विशाल पूंजी और संपत्तियों पर लगी अंतरराष्ट्रीय रोक को तुरंत हटाने की कड़ी शर्त रख दी है, जिसे अन्य देशों के बैंकों में फ्रीज (जब्त) करके रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सूत्रों के मुताबिक, तेहरान इस बात पर अड़ा हुआ है कि बातचीत के पहले ही चरण में उसकी अरबों डॉलर की रोकी गई नकदी को पूरी तरह से बहाल किया जाए। इस गंभीर वित्तीय और राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए वैश्विक मध्यस्थ देशों द्वारा पिछले कई दिनों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर कायम रहने के कारण फिलहाल इसका कोई सर्वमान्य समाधान निकलता दिखाई नहीं दे रहा है।

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