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ब्रह्मा बाप समान जीवन में रहते जीवनमुक्त स्थिति की मजा लो, स्नेह की सौगात मनजीत जगतजीत बनकर दो

आज का दिन विशेष ब्रह्मा बाप के अव्यक्त होने का स्मृति का दिन है। सभी बच्चों के नयनों में ब्रह्मा बाप का स्नेह समाया हुआ है। आज चार बजे से भी पहले बच्चों का स्नेह वतन में पहुंच गया। ब्रह्मा बाप से मिलन मनाने और स्नेह की, अपने दिल के स्नेह की निशानियां, मालायें ब्रह्मा बाप के पास पहुंच गई। हर एक माला की खुशबू में बच्चों का स्नेह समाया हुआ था। हर एक बच्चे के नयन और मुस्कराहट, दिल की बातें बोल रही थी। ब्रह्मा बाप भी हर एक को स्नेह का रिटर्न दे रहे थे। बाप देख रहे हैं कि अभी भी हर बच्चा नयनों की भाषा में अपने दिल का स्नेह दे रहे हैं क्योंकि यह परमात्म स्नेह हर बच्चे को सहज बाप का बनाने वाला है। यह अलौकिक स्नेह “मेरा बाबा'' के अनुभव से अपना बनाने वाला है। यह स्नेह बाप के खजानों का मालिक बनाने वाला है क्योंकि बच्चों ने कहा मेरा बाबा, तो मेरा बाबा कहना और सर्व खजानों के मालिक बनना। यह स्नेह देह का भान सेकण्ड में भुलाकर देही अभिमानी बना देता है। सिवाए बाप के और कुछ भी आत्मा को आकर्षित नहीं करता। इस दिन का बहुत बड़ा महत्व है। सिर्फ स्मृति दिवस नहीं लेकिन समर्थी दिवस है क्योंकि इस दिन बाप ने बच्चों को विश्व सेवा के लिए स्वयं करावनहार बन बच्चों को करनहार बनाने का तिलक दिया। सन शोज़ फादर का करन-हार निमित्त बनाया। सेवा में सफलता का साधन स्वयं करावनहार बना और बच्चों को करनहार बनाया क्योंकि सेवा में सफलता का साधन मैं करनहार हूँ, करावनहार करा रहा है, यह स्मृति वा यह स्थिति बहुत आवश्यक है क्योंकि 63 जन्म की स्मृति मैं पन, देह अभिमान में ले आती है। करावनहार करा रहा है, मैं निमित्त करनहार हूँ, इस स्मृति से ही अपने को निमित्त समझने से देह अभिमान समाप्त हो जाता है। तो बच्चों को इसीलिए करनहार बनाया, स्वयं करावनहार बनें। करनहार बनने से स्वत: ही निमित्त हैं, निर्माण बन जाते हैं। अभी भी बापदादा ने देखा कि बच्चे निमित्त बन सेवा करते हैं, तो निमित्त बन सेवा करने वाले जो सेवाधारी हैं उन्हों के मस्तक में सेवा का फल सितारा चमक रहा है। मैजारिटी बच्चों की सेवा को देख बापदादा खुश है इसलिए ऐसे बच्चों को विशेष ब्रह्मा बाप वाह बच्चे वाह! कहके मुबारक दे रहे हैं।

ब्रह्मा बाप विशेष खुश भी हो रहे हैं और आगे भी सेवा को निमित्त बन आगे बढ़ाने के लिए मुबारक दे रहे हैं। अभी भी ब्रह्मा बाप बच्चों को आप समान फरिश्ता स्थिति में रहने के लिए इशारे दे रहे हैं। बापदादा ने देखा है कि बच्चों का अटेन्शन है कि सदा जैसे ब्रह्मा बाप जीवन में रहते जीवनमुक्त थे, इतनी जिम्मेवारी होते भी इतने बड़े परिवार को सम्भालना, सभी को योगी जीवन वाला बनाना, इतनी सेवा की जिम्मेवारी सम्भालना, सेवा में सदा आगे बढ़ाना, सब कुछ जिम्मेवारी होते भी जीवनमुक्त के मजे में रहा, इसलिए भक्ति मार्ग में ब्रह्मा का आसन कमल आसन दिखाते हैं। जीवनमुक्त बन अभी जीवनमुक्त का मजा लिया और आप सभी बच्चों को भी ऐसा ही बनाया। अभी भी आप बच्चों को फरिश्ता बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियां बताए आप समान बनाने चाहते हैं।

बापदादा ने देखा कि लक्ष्य हर बच्चे का अच्छा है, कोई से भी पूछते हैं आपका लक्ष्य क्या है तो क्या कहते हो? याद है क्या कहते हो? बाप समान बनना ही है। तो बाप समान क्या बनेंगे? इसी जीवन में जीवनमुक्त जीवन का सैम्पुल बनेंगे। बापदादा ने देखा है जो होमवर्क देते हैं, उसमें अटेन्शन तो देते हैं, अनुभव भी करते हैं, लेकिन सदा नहीं करते हैं। अभी भी जो काम दिया था, उसकी रिपोर्ट कई बच्चों ने पुरुषार्थ कर एक-एक मास अटेन्शन दिया है। कई ज़ोन की रिपोर्ट एक मास की रिजल्ट में अच्छी भी आई है। जिन्होंने रिपोर्ट भेजी है, जिस ज़ोन वालों ने भेजी है, उसको बापदादा वाह बच्चे वाह! कह करके मुबारक दे रहे हैं लेकिन बापदादा अभी क्या चाहता है? अभी बापदादा हर बच्चे से यही चाहता है कि अभी कभी-कभी ठीक रहते हैं, लेकिन बाप सदा चाहता है। योगी भी अच्छे बने हैं लेकिन सदा योगी बनाने चाहते हैं। आजकल बापदादा ने बच्चों को काम भी दिया था, सदा रहने के लिए हर घण्टे अपने ऊपर कोई न कोई युक्ति रखो, जो कभी-कभी को बदल सदा शब्द आ जाए। अभी बापदादा यही चाहते हैं जैसे कहावत है मन जीते जगतजीत, मन को जो संकल्प दो वही करे। क्यों? जैसे और कर्मेन्द्रियां जब चाहो जैसे चाहो वैसे करती हैं ना! ऐसे ही मन को भी जो आर्डर करो वही करे। अभ्यास करते हो लेकिन कभी-कभी नहीं भी करते हैं। बापदादा अभी यही चाहते हैं कि मन को शक्तियों की लगाम से जैसे चलाने चाहो वैसे चलाओ। जो गायन है, मन जीते जगतजीत, वह किसका गायन है? आप बच्चों का ही तो गायन है। हर कल्प किया है तभी गायन है क्योंकि जैसे और कर्मेन्द्रियों को मेरी कहते हो वैसे ही मन को भी मेरा कहते हो। मेरा कहना अर्थात् मालिक बनो। मन में जो संकल्प करने चाहो, जितना समय वह संकल्प करने चाहो वह बंधा हुआ है क्योंकि मेरा है। तो बाप-दादा इस स्नेह के दिन यही होमवर्क देने चाहते हैं कि जो संकल्प करने चाहो वही चले, अगर आप शुद्ध संकल्प करने चाहते हो तो वह शुद्ध संकल्प व्यर्थ संकल्प को खत्म कर दे। चाहते हो योग लगाना और संस्कार के कारण व्यर्थ संकल्प चलें, या योग की सिद्धि नहीं मिले, यह कन्ट्रोल होना चाहिए। अगर एक घण्टा योग लगाने चाहते हो तो मन डिस्टर्ब नहीं करे। आत्मा मालिक है, मन मालिक नहीं है, मन तो आत्मा का साथी है। तो साथी को प्यार से आर्डर करो, मनजीत बनो क्योंकि बाप-दादा के पास बहुत बच्चों का समाचार आता है - व्यर्थ संकल्प समय प्रति समय आते हैं। नहीं चाहते हैं तो भी आते हैं। तो क्या यह मालिक कहेंगे! तो ब्रह्मा बाप से स्नेह है ना, तो बाप आज स्नेह में अपने दिल की चाहना सुना रहे हैं कि अभी मन-जीत जगतजीत बनना ही है। तो ब्रह्मा बाप को यह स्नेह की सौगात देंगे ना! स्नेह में क्या दिया जाता है? गिफ्ट दी जाती है ना! तो आज ब्रह्मा बाप बच्चों से यह सौगात देने के लिए कह रहे हैं। तैयार हैं? तैयार हैं? हाथ उठाओ। तो अभी जब भी आर्डर करे तो आज के दिन से व्यर्थ संकल्प आने नहीं देना, कर सकते हो? आज दो घण्टा, चार घण्टा योग की स्टेज में कर्म भी करो, योग भी लगाओ, कर सकते हो? कर सकते हो, करेंगे? चलो अभी बीती सो बीती लेकिन अब आर्डर करें कि आज के दिन व्यर्थ संकल्प को फुलस्टॉप, तो करना पड़ेगा ना।

आज योग में यही लक्ष्य रखो उसी प्रमाण सारे दिन का पुरुषार्थ करना पड़ेगा ना! बाप से स्नेह में जो बाप कहे वह करना है। संकल्प व्यर्थ बन्द, इसकी युक्ति है ब्रह्मा बाप के स्नेह को दिल से याद करो। चाहे साकार में देखा, चाहे नहीं देखा लेकिन बुद्धिबल द्वारा तो सभी ने देखा है ना! देखा है या नहीं देखा है? जो कहते हैं मैंने बाबा का प्यार देखा, मैंने ब्रह्मा बाप की पालना देखी तो क्या उसी से चल रहा हूँ... वह हाथ उठाओ। अच्छा। हाथ उठाके तो खुश कर दिया। बापदादा को खुशी है, हिम्मत तो रखी है ना। लेकिन जब भी कोई ताकत कम हो जाए ना तो सदा बाप के सम्बन्ध, कितने सम्बन्ध हैं कभी बाप, कभी बच्चा भी बन जाता है। कभी बाप तो कभी सखा भी बन जाते हैं इसलिए या संबंध याद करो या प्राप्तियां याद करो, प्राप्तियां और संबंध। जैसे आज दिल से याद कर रहे हो ना! ऐसे याद करने से प्यार पैदा हो जायेगा। आज भी सबके दिल में ब्रह्मा बाप का प्यार आ रहा है ना! तो जब कुछ नीचे ऊपर हो तो सम्बन्ध और प्राप्तियां याद करना। बाप हर बच्चे के साथ सहयोगी है, सिर्फ आप याद करना। तो समझा आज क्या करना है? मनजीत जगतजीत जो गायन है, वह स्वरूप धारण करना है। आर्डर से चलाओ। अभी थोड़ा फ्री छोड़ दिया है ना तो वह अपना काम करता है। अभी अटेन्शन दो। मन मेरे आर्डर में चले न कि आप मन के आर्डर में चलो। चाहते हो ज्ञान की बातों का रमण करें और आ जाती हैं फालतू बातें। तो क्या हुआ? मन मालिक बना या आप मालिक बनें? तो सभी ने यह होमवर्क समझा! मन जीत बनना है। जो आर्डर करें, वह मानेगा जरूर मानेगा, अटेन्शन देना पड़ेगा बस। मातायें या टीचर्स, हो सकता है? हो सकता है? टीचर्स हाथ उठाओ। टीचर्स हाथ उठा रहे हैं। अगर समझते हैं हो सकता है तो हाथ हिलाओ। पहली लाइन तो हिलाओ। भाई हाथ हिलाओ। वाह! फिर तो ब्रहमा बाप को स्नेह की सौगात दी, इसकी मुबारक हो, मुबारक हो।

अच्छा है, बापदादा से स्नेह बहुत सहयोग देता है। मेरा बाबा कहा दिल से, तो मेरा बाबा कहा तो मैं कौन? बाप का सिकीलधा बच्चा। सभी कितने बारी कहते हो मेरा बाबा, मेरा बाबा, कितने बार कहते हो? बाप सुनता है ना, सब नोट करता है। डबल फॉरेनर्स भी सुन रहे हैं ना। बापदादा ने देखा कि फुल सीजन में डबल फॉरेनर्स ने हाजिरी भरी है। मधुबन में हर टाइम हाजिर रहे हैं। अभी भी 350 हैं। अपने टर्न में भी आते हैं लेकिन हर टर्न में भी थोड़े-थोड़े कहाँ न कहाँ से आते हैं। तो अभी यह रिजल्ट बापदादा भी देखते रहेंगे और आप सब भी साक्षी होकर अपने आपकी रिजल्ट देखते रहना। यही याद रखना कि बापदादा को मालिक बनने का वायदा किया है। बापदादा अभी बच्चों को कम से कम एक एक ज़ोन को तो यह कार्य दे सकते हैं कि यह ज़ोन इस सप्ताह या 15 दिन रिजल्ट दे कि व्यर्थ संकल्प नहीं लेकिन जो विषय मन को दिया वह किया या नहीं किया? यह मंजूर है टीचर्स? मंजूर है? ज़ोन को कार्य देवें? हाथ उठाओ टीचर्स।

महाराष्ट्र है ना। तो महाराष्ट्र को तो महान काम देंगे ना। बापदादा को हर एक ज़ोन के लिए प्यार है और सदा यह निश्चय रखते हैं कि यह बच्चे, बाप ने कहा और बच्चों ने किया। ऐसा है? महाराष्ट्र, जो बाप ने कहा वह किया, ऐसा है? महाराष्ट्र वाले हाथ उठाओ। बहुत हैं। पौना क्लास है। तो हर एक ज़ोन बाप के आज्ञाकारी हैं, कांध हिला रहे हैं सभी। बाप को भी निश्चय है कि यह मेरे बच्चे हैं ही निश्चयबुद्धि।

बापदादा यही चाहते हैं कि जो रोज़ के महावाक्य सुनते हो वह होमवर्क है। अगर रोज़ की मुरली जो बाप ने कहा और बच्चों ने किया तो उसको कहा जाता है बाप के सिकीलधे बच्चे, आज्ञाकारी बच्चे। क्या करना है, वह रोज़ की मुरली पढ़ लो क्योंकि बापदादा ने देखा है मैजारिटी बच्चे मुरली से प्यार रखते हैं। अगर कोई नहीं भी रखता हो, तो बापदादा को कोई बच्चा कहे बाबा आपसे मेरा बहुत प्यार है, लेकिन बाप का प्यार किससे है? मुरली से। मुरली के लिए कितना दूर से आते हैं। कोई टीचर ऐसा होगा जो इतना दूर से पढ़ाई पढ़ाने आये। तो जब बाप का प्यार मुरली से है, तो जो मेरा बाबा कहता है, उसका पहला प्यार बाप के साथ बाप की मुरली से होना चाहिए। देखो, ब्रह्मा बाप ने एक दिन भी मुरली मिस नहीं की। चाहे बाम्बे भी जाते रहे, कारणे अकारणे, तो मुरली लिखते थे और मातेश्वरी वह मुरली सुनाती थी। लास्ट डे तबियत थोड़ी ढीली थी, सवेरे का क्लास नहीं कराया लेकिन शाम को क्लास कराने के बाद अव्यक्त हुए। तो ब्रह्मा बाप का प्यार किससे हुआ? मुरली से। जो कोई समझते हैं कि मेरा बाबा से प्यार है तो बाप का जिससे प्यार रहा, बच्चे का रहना चाहिए ना! तो मुरली रोज़ क्लास में पढ़ना वा सुनना। अगर मजबूरी है, बहाना नहीं है, सही कारण है तो किसी से सुनो। जो समझते हैं कि मुरली का इतना महत्व रखूंगा वह हाथ उठाओ। अच्छा, यहाँ तो सब दिखाई दे रहा है, बाप आप पीछे वालों को भी देख रहा है। अच्छा, बहुत अच्छा। बाप बीच-बीच में पेपर लेगा कि आज किसने मुरली नहीं सुनी, वह टीचर लिखके भेजे। पसन्द तो है ना। अच्छा। आज ब्रह्मा बाप हर बच्चे से मिलकर, बहुत-बहुत स्नेह से हर बच्चे को नयनों द्वारा स्नेह दे रहे हैं। अच्छा।

डबल विदेशी भाई बहिनों से:- विदेश वालों को सेवा का उमंग-उत्साह अच्छा है। बापदादा सभी बच्चों को यही कहता है कि सेवा खूब करो क्योंकि समय कभी भी बदल सकता है। जो सेवा करना चाहोगे लेकिन कर नहीं पाओगे, ऐसा समय भी आने वाला है इसलिए जो करना है वह अब करो। कब नहीं, अब। बापदादा हमेशा कहते हैं कि कल पर नहीं छोड़ो। आज पर भी नहीं, अब क्योंकि समय पांचों तत्व बाप के पास आते हैं, हमको बताओ कब तक दु:ख चलेगा! खुद दु:खी हो रहे हैं तो क्या करेंगे? मनुष्यात्माओं को भी दु:खी करेंगे ना इसलिए जो भी आये हैं उसको संकल्प करना है कि जैसे ब्राह्मण जीवन आवश्यक है वैसे अभी के समय अनुसार हर एक को सेवा भी जरूरी है। करो या कराओ। बाकी जो बापदादा ने होमवर्क दिया, मनजीत जगतजीत बनना ही है। आपका ही गायन है, उसको रिपीट करना है। अच्छा।

चारों ओर से बच्चों द्वारा सन्देश आये हैं। चारों ओर के आये हुए प्यार के मीठे-मीठे भाव या भिन्न-भिन्न शब्दों की याद, चारों ओर से भिन्न-भिन्न पत्र आये हैं, सभी को बापदादा रेसपान्ड कर रहे हैं हर बच्चा स्नेह में बाप के दिल में समाया हुआ है और यह अविनाशी स्नेह सदा बाप का और बच्चों का अनादि अविनाशी है और सारा संगमयुग यह बाप बच्चों का मिलन निश्चित ही है। अच्छा।

अभी जो बच्चे सम्मुख है या दूर बैठे भी देख रहे हैं, बापदादा ने सुना कि अभी तो चारों ओर यह कोशिश की है कि हर एक देश में सेन्टर पर भी जाके देखते हैं, सुनते हैं, चाहे रात का कितना भी बजता है तो भी देखते हैं, यह भी साइंस के साधन आपके लिए ही निकले हैं और आपको ही लाभ हो रहा है। अगर साइंस द्वारा विनाश होगा तो भी आपके राज्य के लिए कर रहे हैं। तो चारों ओर के स्नेही बच्चों को विशेष ब्रह्मा बाप का यादप्यार, दिल का दुलार, दिल का प्यार स्वीकार हो।

वरदान:-सच्चाई-सफाई की धारणा द्वारा समीपता का अनुभव करने वाले सम्पूर्णमूर्त भव
सभी धारणाओं में मुख्य धारणा है सच्चाई और सफाई। एक दो के प्रति दिल में बिल्कुल सफाई हो। जैसे साफ चीज़ में सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। वैसे एक दो की भावना, भाव-स्वभाव स्पष्ट दिखाई दे। जहाँ सच्चाई-सफाई है वहाँ समीपता है। जैसे बापदादा के समीप हो ऐसे आपस में भी दिल की समीपता हो। स्वभाव की भिन्नता समाप्त हो जाए। इसके लिए मन के भाव और स्वभाव को मिलाना है। जब स्वभाव में फ़र्क दिखाई न दे तब कहेंगे सम्पूर्णमूर्त।
स्लोगन:-बिगड़े हुए को सुधारना - यह सबसे बड़ी सेवा है।

कार्यालय:-राजयोगभवन,E-5 अरेरा कॉलोनी भोपल मप्र,

संपर्क:-ईश्वरीय सेवा और सहयोग में बी.के.इंजीनियर नरेश बाथम:- 9691454063,9406564449

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